Tuesday, March 10, 2026

Controversy:एनसीईआरटी ने विवादित अध्याय को कक्षा 8 की पुस्तक से हटाया! सार्वजनिक माफी मांगने का लिया निर्णय

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Controversy:एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब “Exploring Society: India and Beyond” को वापस लेने और विवादित अध्याय पर सार्वजनिक माफी मांगने का फैसला किया है. यह अध्याय “The Role of Judiciary in Our Society” (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) था, जिसमें न्यायपालिका के बारे में कुछ विवादित बातें थी.सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्याय पर आपत्ति जताई थी और एनसीईआरटी को इसे हटाने का आदेश दिया था. एनसीईआरटी ने अब इस अध्याय को हटाकर सार्वजनिक माफी मांगी है.

Controversy(pc-google)

इस विवाद के बाद एनसीईआरटी ने अपनी गलती को स्वीकार किया है और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने का आश्वासन दिया है. यह फैसला शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो शिक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

एनसीईआरटी ने विवादित अध्याय को हटाया

एनसीईआरटी के विवादित पुस्तक के चैप्टर IV में न्यायपालिका की चुनौतियों जैसे कि भ्रष्टाचार, मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई थी.इस तरह के विवरण ने न्यायपालिका की गरिमा और उसकी भूमिका पर सवाल उठाए, जिससे विवाद बढ़ गया.एनसीईआरटी ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है कि इस अध्याय में कुछ अनुचित बातें शामिल हो गई थी, जो गलती से किताब में आ गई.उन्होंने कहा कि उनकी कोई मंशा नहीं थी कि वे किसी संवैधानिक संस्थान की प्रतिष्ठा को कम करें और उन्होंने ईमानदारी से इस गलती के लिए माफी मांगी है.

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कोर्ट ने किया था टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा कि न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट स्वीकार्य नहीं है. कोर्ट ने किताब को वस्तुतः प्रतिबंधित कर दिया और सभी प्रतियों को वापस लेने का आदेश भी जारी किया.आगे की सुनवाई 11मार्च को होने वाली है.

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एनसीईआरटी ने सार्वजनिक रूप से मांगी माफी

एनसीईआरटी ने कहा, “हम हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हैं और सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते है.” यह फैसला उस समय लिया गया है जब स्कूल की किताबों और उनमें संवैधानिक संस्थाओं के चित्रण पर बढ़ती नजर रखी जा रही है. शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबें पूरे भारत में केंद्रीय और राज्य सरकार से जुड़े स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं, इसलिए किसी भी बदलाव या अध्याय हटाने का असर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ता है.

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