Asaram Case Update: 27 मई बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ से आसाराम को बड़ा झटका लगा. नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी.जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की बेंच ने फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि सजा में कोई राहत नहीं मिलेगी. मगर इसी केस में फंसे शिल्पी और शरतचंद को कोर्ट ने बरी कर दिया. 20 अप्रैल को बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.अभी अंतरिम जमानत पर बाहर आसाराम को अब जेल जाकर सरेंडर करना होगा.

कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपों को माना सही
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि पीड़िता के लगाए गए दुष्कर्म के आरोप भरोसेमंद हैं और इन्हें पुख्ता सबूतों का समर्थन हासिल है. इसी आधार पर कोर्ट ने आईपीसी की धारा 376 के तहत आसाराम को दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा. आदेश के बाद आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना होगा.
सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखी दलीलें
इस केस में हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक रोजाना सुनवाई चली. बहस के दौरान बचाव पक्ष और सरकारी वकील ने अपनी-अपनी बात विस्तार से रखी. बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा कि ये पूरा केस झूठा और मनगढ़ंत है. साथ ही ये दलील दी कि पीड़िता के माता-पिता के बयानों में काफी विरोधाभास है. वकीलों ने ये भी तर्क रखा कि जिस रात घटना हुई, उस रात आसाराम और पीड़िता के बीच कोई कॉल रिकॉर्ड नहीं मिला.”समानता के सिद्धांत” का जिक्र करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जिन सबूतों के आधार पर बाकी आरोपियों को बरी किया था, उन्हीं सबूतों के आधार पर आसाराम को दोषी करार नहीं दिया जा सकता.

पीड़िता का बयान ही दोष साबित करने को काफी
उधर, अभियोजन पक्ष और पीड़िता के वकील पी.सी. सोलंकी ने कोर्ट में तर्क दिया कि पॉक्सो केस में सजा दिलाने के लिए सिर्फ पीड़िता का बयान ही पर्याप्त होता है. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देकर उन्होंने बताया कि कानून में पीड़िता के बयान को सबसे ज्यादा अहमियत दी गई है.अभियोजन ने ये भी कहा कि इस केस के गवाहों पर हमले हुए और कुछ की हत्या कर दी गई, जो दिखाता है कि सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को डराने की कोशिश हुई.
सबूतों के आधार पर दिया गया फैसला
फैसले के बाद पीड़िता पक्ष के वकील पी.सी. सोलंकी ने कहा कि कोर्ट ने सभी तथ्यों और सबूतों को गहराई से परखने के बाद ही सही फैसला दिया है.

2018 में ट्रायल कोर्ट ने दी थी सजा
गौर करने वाली बात है कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग छात्रा से रेप केस में आसाराम को दोषी माना था और उसे आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी. इसी केस में सह-आरोपी शरद और शिल्पी को 20-20 साल की जेल हुई थी.निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सभी आरोपियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की थी.
पूरे देश में मचा था हंगामा
ये मामला तब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था जब एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि उसे धार्मिक इलाज और आध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर आश्रम बुलाया गया और वहां उसके साथ यौन शोषण व रेप किया गया. पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और हालात से जुड़े सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराया था.
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