Friday, May 8, 2026

Donald Trump को अमेरिकी अदालत से लगा बड़ा झटका! नए टैरिफ आदेश को किया रद्द

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Donald Trump:अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को तगड़ा झटका लगा है. अमेरिकी संघीय व्यापार अदालत ने ट्रंप सरकार के नए ग्लोबल इम्पोर्ट टैरिफ को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत मिली सीमित शक्तियों का दुरुपयोग किया.साथ ही कानून के दायरे से बाहर जाकर 10% इम्पोर्ट सरचार्ज लगाने का प्रयास किया, जो गलत है.

Donald Trump (photo credit -google)

व्यापार अधिनियम कानून बनाने की वजह क्या थी?

अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल बड़े व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे के नाम पर नहीं कर सकता.कोर्ट के अनुसार, यह कानून 1970 के दशक में सामने आए खास बैलेंस ऑफ पेमेंट्स यानी भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए लाया गया था. इसका मकसद आज के दौर के सामान्य व्यापार घाटे को कवर करना नहीं था.

Donald Trump (photo credit -google)

ट्रंप के पहले वाले टैरिफ को भी कोर्ट ने किया था रद्द

असल में, इस साल की शुरुआत में ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ सिस्टम को खारिज कर दिया था.ट्रंप ने उसे आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत लागू किया था. इसके बाद फरवरी में ट्रंप ने धारा 122 का सहारा लेकर नए टैरिफ लागू कर दिए. इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को ज्यादा से ज्यादा 150 दिनों के लिए 15% तक का अस्थायी आयात शुल्क लगाने का अधिकार मिलता है.

Donald Trump (photo credit -google)

ट्रंप सरकार का तर्क था कि अमेरिका के भारी व्यापार घाटे को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था. लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में जिस “बैलेंस ऑफ पेमेंट्स क्राइसिस” का जिक्र है, वह मौजूदा दौर के व्यापार घाटे से अलग है.

अब माना जा रहा है कि इस फैसले को अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट में चुनौती दी जाएगी और केस फिर से सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है. इससे पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द किए थे, तब ट्रंप ने व्हाइट हाउस में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, “हम रुकेंगे नहीं.हम ज्यादा पैसा लाकर रहेंगे.” ट्रंप ने धारा 122 को अपने सबसे ताकतवर हथियारों में से एक करार दिया था.

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ट्रंप पर सियासी और कानूनी विवाद बढ़ा

उधर, ट्रंप के कार्यकारी अधिकारों के इस्तेमाल पर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है.कई आलोचकों के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन नेताओं का भी मानना है कि टैरिफ लगाने का संवैधानिक अधिकार कांग्रेस को है, व्हाइट हाउस को नही. सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककोनेल पहले ही साफ कर चुके हैं कि कांग्रेस को नजरअंदाज करके आपातकालीन शक्तियों के जरिए टैरिफ लगाना गैरकानूनी है.

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