Tuesday, May 5, 2026

Vivek Agnihotri ने किया खुलासा , चुनाव से पहले चला था “द बंगाल फाइल्स” का दांव

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Vivek Agnihotri:बंगाल चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के बाद विवेक ने इंस्टाग्राम पर एक पुराना वीडियो पोस्ट किया. उस वीडियो में उन्होंने खुलासा किया कि ममता बनर्जी के सत्ता में रहते हुए “द बंगाल फाइल्स” फिल्म रिलीज करते वक्त उन्हें किन दिक्कतों से गुजरना पड़ा था.

Vivek Agnihotri(Photo credit -google)

वीडियो पोस्ट कर लिया निशाने पर

विवेक अग्निहोत्री ने वीडियो शेयर करने के साथ एक लंबा कैप्शन भी लिखा.उन्होंने कहा, “अब कभी नहीं. जो लोग नहीं जानते उन्हें बताना चाहूंगा कि ‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज होने के बाद ममता बनर्जी ने मुझे बंगाल में ‘बैन’ कर दिया था. फिल्म को थिएटर्स से उतार दिया गया और कहा गया था कि मुझे बंगाल में घुसने नहीं दिया जाएगा.

Vivek Agnihotri(Photo credit -google)

उन्होंने आगे लिखा, ” पिछले साल पश्चिम बंगाल में ‘द बंगाल फाइल्स’ पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी.हमारे ट्रेलर लॉन्च को भी होने नहीं दिया गया. हम पर हमले किए गए और हमारे साथ मारपीट हुई.मेरे खिलाफ कई FIR दर्ज कर दी गई.मुझे बंगाल में प्रतिबंधित कर दिया गया। मैं राज्यपाल से अपना सम्मान लेने तक नहीं जा पाया.”

फिल्म को गुपचुप तरीके से दिखाया

विवेक ने यह भी बताया कि उन्होंने चुनाव से पहले लोगों को चोरी-छिपे “द बंगाल फाइल्स” दिखाई थी.उन्होंने कहा, “लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी. इन चुनावों के दौरान हमने कोशिश की कि ‘द बंगाल फाइल्स’ को बंगाल में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गुप्त रूप से पहुंचाया जाए. मुझे खुशी है कि हम डटे रहे और अपने ढंग से संघर्ष किया.और आखिरकार… यह ऐतिहासिक जीत हासिल हुई.बंगाल की जनता को बधाई.अब आप बिना किसी खौफ के, सिर उठाकर चल सकते हैं.”

Vivek Agnihotri(Photo credit -google)

क्या ‘द बंगाल फाइल्स’ पर पश्चिम बंगाल में रोक लगी थी?

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने ‘द बंगाल फाइल्स’ पर कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया था. मगर, सिनेमाघर मालिकों ने मिलकर फिल्म को स्क्रीन न करने का फैसला किया था.गौर करने वाली बात ये है कि किसी भी थिएटर ओनर ने आधिकारिक तौर पर फिल्म न दिखाने की वजह नहीं बताई.अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स और आई एम बुद्धा प्रोडक्शंस की बनाई ” द बंगाल फाइल्स ” 1940 के दशक के बंगाल में हुई खूनी घटनाओं पर बेस्ड है, खास तौर से 1946 के ग्रेट कलकत्ता हत्याकांड पर. फिल्म उस दौर को दिखाती है जब विचारधारा, मजहब और जिंदगी की लड़ाई एक-दूसरे से टकरा रही थी.

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