Wednesday, April 22, 2026

Supreme Court आज करेगा ममता बनर्जी के ईडी मामले पर सुनवाई, जानें पूरा मामला

Must read

Supreme Court:सुप्रीम कोर्ट आज ईडी की उस अर्जी पर सुनवाई करेगा, जिसमें ममता बनर्जी पर I-PAC रेड के दौरान जांच में दखल देने और सबूत हटवाने के आरोप लगाए गए हैं. ईडी का कहना है कि जनवरी में छापेमारी के समय ममता बनर्जी पुलिस अफसरों के साथ मौके पर पहुंची थीं और लैपटॉप, मोबाइल व दस्तावेज वहां से हटवा दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी ईडी की याचिका पर सुनवाई करेगा.इसमें ममता पर भारतीय राजनीतिक एक्शन कमेटी (I-PAC) पर हुई छापेमारी के दौरान जांच में दखल देने का आरोप लगाया गया है.यह मामला केंद्रीय एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रहे कानूनी टकराव का हिस्सा बन गया है.

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी, जब ईडी ने कथित कई करोड़ रुपये के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में I-PAC के ठिकानों पर रेड डाली थी.एजेंसी का दावा है कि छापे के वक्त ममता बनर्जी 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों और सीनियर अधिकारियों के साथ I-PAC दफ्तर और इसके फाउंडर प्रतीक जैन के घर पहुंची थी.

Supreme Court  Mamata Banerjee (Photo credit -google)

ईडी का क्या आरोप है?

ईडी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बिना किसी अधिकार के कार्रवाई में हस्तक्षेप करते हुए लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा से जुड़े दस्तावेज जैसे जरूरी सबूत वहां से हटवा दिए. इससे जांच प्रभावित हुई और एजेंसी के काम में अड़चन आई.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की थी?

इस केस की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को बेहद असामान्य और दुर्भाग्यपूर्ण बताया था. कोर्ट ने इस पर भी चिंता जाहिर की थी कि अगर कोई सीनियर संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति केंद्रीय एजेंसी की जांच में रुकावट डालता है, तो ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कानूनी विकल्प क्या होंगे.

Supreme Court  Mamata Banerjee (Photo credit -google)

अब तक क्या-क्या हुआ?

ईडी की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने और मुख्यमंत्री व राज्य के डीजीपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. एजेंसी का कहना है कि अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को भौतिक रूप से रोका जाता है, तो उन्हें लाचार नहीं छोड़ा जा सकता.

Supreme Court  Mamata Banerjee (Photo credit -google)

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका की वैधता पर ही सवाल खड़े किए हैं. राज्य सरकार की दलील है कि ईडी एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों का हवाला देकर सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती.

राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि यह रेड राजनीतिक मंशा से की गई थी और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश है.

इसी बीच, इससे जुड़े घटनाक्रम में I-PAC के को-फाउंडर विनेश कुमार चंदेल को 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद संगठन ने पश्चिम बंगाल में अपना कामकाज सीमित कर दिया या अस्थायी तौर पर रोक दिया है.बाद में पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 10 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया.फिलहाल वह 23 अप्रैल तक हिरासत में रहेंगे.

ये भी पढ़ें:Supreme Court ने लगाई NCERT को फटकार! बोले -“बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते”

- Advertisement - spot_img

More articles

- Advertisement - spot_img

Latest article