Ram Mandir:अयोध्या का राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है लेकिन इस बार चर्चा का कारण मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों से पैसे के कथित दुरुपयोग का मामला है.उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है. SIT की टीम 15 और 16 जून को अयोध्या पहुंची और इस सिलसिले में कई अहम लोगों से पूछताछ की. मंदिर परिसर के दानपात्रों से धन की हेराफेरी के आरोपों के बाद यह मामला सामने आया है, और अब SIT इसकी जांच में जुटी है.
पहले समझें – राम मंदिर में दान के पैसे की हेराफेरी कब से कब तक हुई?
आरोप के मुताबिक, राम मंदिर में दान की रकम का गबन करीब 15 महीने तक बिना किसी रुकावट के चलता रहा. संदिग्ध लोग लगातार दानपात्रों से जमा हुई रकम को इधर-उधर करते रहे.कई बार तो ये गड़बड़ी अपने चरम पर पहुंच गई.

महाकुंभ और माघ मेले के दौरान
पिछले साल के महाकुंभ और इस साल के माघ मेले में जब प्रयागराज से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या दर्शन करने पहुंचे, तो चढ़ावे की रकम में जबरदस्त इजाफा हुआ.गबन करने वालों के लिए यही वक्त सबसे मुनाफे वाला साबित हुआ. गिनती में लगे लोगों ने इसका फायदा उठाकर एक ही दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक दान की रकम निकाल ली.
आखिरी महीनों में बढ़ गया था गबन
जांच में पता चला कि पकड़े जाने से ठीक पहले के कुछ महीनों में कर्मचारियों ने सबसे ज्यादा रकम निकाली थी. महाकुंभ से शुरू हुआ यह सिलसिला करीब 15 महीने तक चलता रहा. हैरानी की बात ये है कि अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों के मौजूद रहने के बावजूद किसी को इसकी खबर नहीं लगी. सोशल मीडिया पर गबन की रकम 200 करोड़ से 1400 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है.
अब समझें – राम मंदिर से इतना बड़ा गबन कैसे हुआ?
इतनी बड़ी रकम का गबन किसी एक शख्स का काम नहीं था. ये नियुक्तियों में पक्षपात, सुरक्षा में लापरवाही और गिनती की प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाकर रचा गया सुनियोजित षड्यंत्र था.

- भर्ती में धांधली और ‘टिन्नू’ का प्रभाव
मंदिर में रोज मिलने वाले चढ़ावे की गिनती का जिम्मा SBI को दिया गया था.लेकिन बैंक ने गिनती के लिए कर्मचारियों को एक आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए रखा.आरोप है कि कंपनी में वही लोग रखे गए जिन्हें ट्रस्ट ने चुना था.ज्यादातर लोग ट्रस्ट के पदाधिकारियों के रिश्तेदार या जान-पहचान वाले थे. इसमें ‘टिन्नू’ नाम के व्यक्ति की अहम भूमिका सामने आई है, जिसने अपने रसूख से 35-40 लोगों को नौकरी दिलवा दी. - गिनती के समय ही गायब हो जाती थी रकम
चोरी का तरीका काफी चालाकी भरा था. गिनती शुरू करने से पहले सभी दानपात्र खोलकर रकम एक जगह रख दी जाती थी, इसलिए पहले से कुल राशि का अंदाजा नहीं होता था. इसी का फायदा उठाकर कर्मचारी गिनती के दौरान ही पैसे निकाल लेते थे. अंत में जो रकम बचती, वही रजिस्टर में दर्ज कर दी जाती थी, जिससे गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती थी. - बिना जांच के अंदर-बाहर आते-जाते थे कर्मचारी
मंदिर में सुरक्षा कड़ी होने के बावजूद ट्रस्ट के ये कर्मचारी गले में आईकार्ड लगाकर पूरे परिसर में बेरोकटोक घूमते थे.सबसे बड़ी चूक ये रही कि ट्रस्ट के करीबी होने की वजह से इनकी न तलाशी होती थी, न ही कोई सत्यापन.महाकुंभ और माघ मेले में जब चढ़ावा कई गुना बढ़ गया, तो इन्होंने लंबी गिनती के समय का फायदा उठाकर रोज 10-15 लाख रुपये तक निकाल लिए. - कम सैलरी की आड़ में बड़ा खेल
पकड़े गए कर्मचारी 12 से 18 हजार रुपये महीने पर काम कर रहे थे.इतनी कम तनख्वाह पर भी वे लंबे समय तक ड्यूटी करते थे, क्योंकि उनका मकसद वेतन नहीं, बल्कि चढ़ावे की करोड़ों की रकम हड़पना था.चूंकि ये लोग ट्रस्ट की सिफारिश पर आए थे, इसलिए बैंक के अधिकारियों ने भी इनके काम पर सवाल नहीं उठाए. इस मामले में बैंक कर्मियों की मिलीभगत की भी जांच हो रही है. - CCTV और निगरानी व्यवस्था रही नाकाम

परिसर में कैमरे लगे होने के बावजूद निगरानी और ऑडिट सिस्टम पूरी तरह फेल रहा. कैमरों ने घटनाएं रिकॉर्ड तो कीं, लेकिन रियल-टाइम मॉनिटरिंग न होने से चोरी का तुरंत पता नहीं चल सका.अब SIT ने जांच शुरू कर दी है और इन फुटेज को सबूत के तौर पर जब्त किया गया है, जिससे कई बड़े खुलासे होने की संभावना है.
राम मंदिर गबन मामले का पर्दाफाश कैसे हुआ?
राम मंदिर में हुए इस बड़े गबन का खुलासा मुख्य रूप से दो स्टेज में हुआ.चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की आशंका होने पर व्यवस्था पर नजर रखी गई, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया.हालांकि, जब ये प्रकरण सामने आया तो ट्रस्ट ने शुरुआत में इसे पूरी तरह गुप्त रखकर दबाने की कोशिश की थी.
ये मामला तब सार्वजनिक हुआ जब समाजवादी पार्टी प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दान के करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाया. उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि चढ़ावे की करोड़ों की राशि गायब मिली है, जो बेहद शर्मनाक है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर खुद संज्ञान लेने की मांग भी की.
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