Dhurandhar:फिल्म धुरंधर में भले ही मुख्य भूमिका में रणवीर सिंह दिखे हैं, लेकिन फिर भी दर्शकों की सबसे अधिक ध्यान अक्षय खन्ना पर ही रहा. आदित्य धर की इस जासूसी थ्रिलर में अक्षय ने रहमान बलूच, यानी रहमान डकैत, को एक तीखे तेवर, डरावने और रहस्यमय अंदाज़ में पेश किया, जिससे कथा में एक नई परत जुड़ गई.फिल्म में धांसू धुन ”Fa9la” पर उनका धमाकेदार डांस पहले ही सोशल मीडिया पर धूम मचा चुका है.

बता दें कि फिल्म में दिखाए गए इस भूमिका के पीछे एक असली व्यक्ति छिपा है, जिसकी ख़ौफ़ ने कभी कराची के ल्यारी क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था.अब सवाल यह है कि क्या पर्दे पर प्रस्तुत किया गया रहमान उतना ही बेरहमी वाला था, जितनी कि विभिन्न कहानियों में बताया जा रहा है? तो चलिए,इस रहस्यमय डकैत की वास्तविक पहचान को समझते हैं.
कौन है “रहमान डकैत” ?
कराची के ल्यारी क्षेत्र की संकरी गलियों में हमेशा से ही गरीबी, बेरोज़गारी और अपराध का साया रहा है.1700 के दशक से मौजूद यह इलाका, उपेक्षा के कारण गिरोहों का अड्डा बन गया और 1979 में इसी माहौल में मोहम्मद दादल के घर एक बच्चा जन्मा—सरदार अब्दुल रहमान बलूच, जिसे बाद में पूरी दुनिया ने रहमान डकैत के नाम से पहचाना.
कहा जाता है कि उसने किशोरावस्था में ही अपराध की दुनिया में कदम रखा था और जब वह केवल 13 वर्ष का था, तब उसने पहली हत्या की, और 15 वर्ष की उम्र में अपने परिवार से जुड़ी एक भयावह घटना का सामना किया. इन शुरुआती कहानियों ने उसे ऐसी राह पर धकेल दिया जहाँ हिंसा ही उसकी पहचान बन गई.
रहमान 1990 के दशक के अंत में हाजी लालू के गिरोह में शामिल हुआ और 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद पूरी कमान संभाल ली. उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि ल्यारी की गलियों में उसके इज़ाज़त के बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाता था. कहा जाता है कि उसका नेटवर्क जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, अपहरण और नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति जैसे संगठित अपराधों में गहराई से जुड़ा था.अपने चचेरे भाई उजैर बलूच और डरावने सहयोगी बाबा लाडला के साथ मिलकर रहमान ने विरोधी गिरोहों को बेरहमी से नष्ट किया.ल्यारी के निवासी इस गैंग युद्ध के दौरान लगातार भय के साए में जीते रहे, और कई लोगों ने बताया कि रहमान के शासन में मृत्यु रोज़मर्रा की बात बन गई थी.
मां को उतारा था मौत के घाट
रहमान डकैत की क्रूरता के बारे में कहा जाता है कि वह दुश्मनों को मारने के बाद उनके सिर काटकर अपने गिरोह के साथ फुटबॉल खेलता था. कई स्थानीय स्रोतों के अनुसार, उसने केवल पंद्रह वर्ष की आयु में अपनी ही माँ की हत्या कर दी, क्योंकि उसे शक था कि माँ का संबंध उस गिरोह से है जिसने उसके पिता की जान ली थी. इन घटनाओं के विभिन्न विवरण मौजूद हैं, लेकिन सभी ने मिलकर रहमान की ऐसी भयावह प्रतिमा बनाई है कि वह कराची के सबसे डरावने अपराधियों में से एक माना जाता है.
रहमान ने केवल बंदूक की ताकत से नहीं, बल्कि राजनीति में भी अपनी जगह बनानी शुरू कर दी. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ उसके बढ़ते संबंधों ने उसे “स्थानीय शक्ति केंद्र” के रूप में स्थापित कर दिया.उसने अपना नाम बदलकर सरदार अब्दुल रहमान बलूच रख लिया और 2008 में पीपल्स अमन कमेटी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शांति स्थापित करना बताया गया. फिर भी, राजनीतिक उलट‑फेर और गिरोहों के बदलते समीकरणों के बीच रहमान स्वयं भी विवादों का केंद्र बन गया.
कैसे हुआ था अंत?
रहमान डकैत का ख़त्म होना अगस्त 2009 में कराची पुलिस के साथ हुई एक टकराव में हुआ. उसकी मृत्यु जितनी सीधी‑सादी लग रही थी, उतनी ही कई अनसुलझे सवाल पीछे छोड़ गई.स्थानीय राजनेताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि रहमान की हत्या गैंग‑विवाद, राजनीतिक दबाव और गुप्त सौदों के जाल में बुनी किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी.वह केवल 29 वर्ष की आयु में समाप्त हो गया, पर उसकी भयावहता, उसके किस्से और उसकी निर्दयी छवि आज भी ल्यारी की दीवारों पर एक धब्बे की तरह चिपकी हुई है. अब धुरंधर के माध्यम से यह नाम भारत के दर्शकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है.
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