Wednesday, June 10, 2026

TMC में मचा हड़कंप,ममता बनर्जी की पूर्व सहयोगी सुष्मिता देव ने छोड़ी पार्टी

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TMC:तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक मतभेद अब और गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है.पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से त्यागपत्र देकर ममता बनर्जी के गुट को एक और बड़ा झटका दिया है.पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर असंतोष और बगावत की अटकलें तेज थीं, और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इस स्थिति को और पेचीदा कर दिया है.

इससे पहले तृणमूल के कद्दावर नेता और राज्यसभा में लंबे समय तक मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी से अलग हो चुके हैं.लगातार हो रहे इस्तीफों से साफ लग रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नाराजगी तेजी से बढ़ रही है.

TMC(photo credit -google)

सुष्मिता देव ने इस्तीफा क्यों दिया?

असम के सिलचर से पूर्व सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा तुरंत प्रभाव से मंजूर करने का अनुरोध किया है.हालांकि उन्होंने इस्तीफे के पीछे की ठोस वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह फैसला तृणमूल कांग्रेस में बढ़ते अंदरूनी असंतोष से जुड़ा है.

सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर और अचानक इस्तीफा

सुष्मिता देव पहले कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था और 2021 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया. TMC में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया और बाद में राज्यसभा भी भेजा गया.इस पृष्ठभूमि में उनका अचानक पद छोड़ना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है.

क्या यह सुखेंदु शेखर रॉय के बाद दूसरा बड़ा झटका है?

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे वक्त आया है जब कुछ दिन पहले ही TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. ममता बनर्जी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था की नाकामी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे.

TMC(photo credit -google)

रॉय ने लिखा था कि बंगाल की जनता ने पार्टी के भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को नकार दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार राज्य के विकास के लिए काम कर रही है.उनके इस बयान ने बंगाल की सियासत में हड़कंप मचा दिया था.अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने उस पूरे विवाद को और हवा दे दी है.

ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी परीक्षा क्या है?

पिछले कई सालों से तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है. लेकिन लगातार इस्तीफों और अंदरूनी खींचतान ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठा दिए हैं.राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह असंतोष और बढ़ा तो भविष्य में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है.

TMC(photo credit -google)

अब ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को टूट से बचाने और नाराज नेताओं को मनाकर साथ बनाए रखने की है.दूसरी तरफ भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल की सियासत में अपने लिए सुनहरा अवसर मान रही है.आने वाले दिनों में TMC के भीतर की ये उठापटक बंगाल की राजनीति को और तेज कर सकती है.

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