Wednesday, May 6, 2026

Donald Trump ने रोका पाकिस्तान का “प्रोजेक्ट फ्रीडम”, ईरान को लेकर जारी रखेंगे नाकाबंदी

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Donald Trump:अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर “प्रोजेक्ट फ्रीडम” रोक दिया है. यह अभियान हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को बाहर निकालने के लिए चलाया जा रहा था. ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान के साथ डील पर बातचीत जारी है, इसलिए यह कदम उठाया गया है. हालांकि, ईरान की समुद्री नाकाबंदी पहले की तरह चलती रहेगी.

Donald Trump ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” पर लगाया रोक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल स्थगित करने का ऐलान किया है. यह अभियान हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे कारोबारी जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाया गया था.ट्रंप ने “ट्रुथ सोशल'” पर पोस्ट करके यह जानकारी दी. उन्होंने साफ कहा कि जहाजों को निकालने का ऑपरेशन रोका गया है, लेकिन ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी पहले जैसी सख्ती के साथ जारी रहेगी.

Donald Trump (photo credit -google)

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान समेत कुछ और देशों के अनुरोध पर लिया गया है.फिलहाल पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता करवाने के लिए मध्यस्थता कर रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य ऑपरेशन में उन्हें बड़ी कामयाबी मिली है.साथ ही, ईरानी प्रतिनिधियों के साथ एक मुकम्मल और फाइनल डील की तरफ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है, इसी वजह से यह फैसला किया गया है.

Donald Trump (photo credit -google)

इस स्थगन का मकसद ये देखना है कि क्या तेहरान और वॉशिंगटन के बीच डील फाइनल होकर उस पर दस्तखत हो सकते हैं.ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि समझौते की उम्मीद को देखते हुए सहमति से यह कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा कि “प्रोजेक्ट फ्रीडम” यानी जहाजों की आवाजाही कुछ समय के लिए ही रोकी गई है, ताकि बातचीत पूरी हो सके.

Donald Trump (photo credit -google)

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी रविवार को इस प्रोजेक्ट का ऐलान किया था. उन्होंने बताया था कि दुनिया के कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका से मदद की गुहार लगाई थी. इसके बाद सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने यह अभियान शुरू कर दिया था. इस मिशन के लिए अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर तैयारी की थी. इसमें मिसाइल रोधी युद्धपोत, 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान और ड्रोन तैनात किए गए थे.साथ ही, करीब 15,000 जवानों को भी इस मिशन में लगाया गया था.इस ऑपरेशन का मकसद अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करना था.

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