Arvindra Kejriwal:आबकारी नीति मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है.जस्टिस शर्मा ने कहा, “मैं इन आवेदनों को खारिज करती हूं क्योंकि मैंने संविधान की शपथ ली है और संविधान कहता है कि फैसले किसी दबाव में नहीं किए जाते. मैं इस केस की सुनवाई से पीछे नहीं हटूंगी.”
आबकारी नीति मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुनाया.केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. इस दौरान केजरीवाल ने कोर्ट से अपना जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया.सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा, “मैडम, अगर मेरा जवाब रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया तो यह न्याय के साथ लापरवाही होगी.”

अदालत ने की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर किसी जज का फैसला ऊपरी अदालत बदल देती है तो किसी भी प्रतिवादी को यह कहने का अधिकार नहीं है कि संबंधित जज फैसला देने के लायक नहीं हैं. जज की काबिलियत पर फैसला उसकी उच्च अदालत करती है, न कि प्रतिवादी.
कोर्ट में अखिल भारतीय देवता परिषद के कार्यक्रमों में जज के शामिल होने के मुद्दे पर बताया गया कि वह महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई थी, जहां उन्होंने जूनियर वकीलों और बार के अन्य सदस्यों को संबोधित किया था. सिर्फ अरविंद केजरीवाल की विचारधारा से सहमत न होने की वजह से इस तरह के आरोप लगाना गलत है.
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उनका न्यायिक करियर 34 साल का रहा है. “क्या अब ऐसा हो सकता है कि जजों को वादियों द्वारा तय की गई अतिरिक्त परीक्षा पास करनी पड़े कि वे केस सुनने के योग्य हैं? क्या उन्हें वादियों के बनाए मानकों पर पहले खुद को साबित करना होगा? ऐसे में जजों को ये भी साबित करना होगा कि उन्होंने किसी संगठन के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया या उनके परिवार का कोई सदस्य वकालत के पेशे में नहीं है.”

कैच-22 रणनीति पर अदालत सख्त
जस्टिस शर्मा ने कहा कि आवेदक ने अपने लिए “विन-विन” या कैच-22 जैसी स्थिति बना ली है.अगर अदालत खुद को केस से अलग करती है तो उसके आरोप सही साबित हो जाएंगे, और अगर अलग नहीं करती तो भी वह फैसले पर सवाल खड़ा कर सकता है.कोर्ट ने कहा कि ऐसी रणनीतियों को मंजूरी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया और संस्था की साख पर असर पड़ने का खतरा है.
जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस मामले में मुझे ऐसी हालत में ला दिया गया है कि चाहे मैं खुद को अलग करूं या न करूं, दोनों ही सूरत में नुकसान है.अगर उसे राहत नहीं मिलती है तो वह कहेगा कि उसे पहले से ही नतीजे का अंदाजा था.अगर उसे राहत मिल जाती है तो वह कह सकता है कि अदालत ने दबाव में आकर फैसला सुनाया. वादी हालात को अपने फायदे के हिसाब से पेश कर सकता है.

जस्टिस शर्मा ही करेंगी सुनवाई
जस्टिस शर्मा ने कहा, “मैं इन आवेदनों को खारिज कर रही हूं क्योंकि मैंने संविधान के प्रति शपथ ली है और संविधान कहता है कि फैसले दबाव में नहीं लिए जाते. मैं इस केस की सुनवाई से पीछे नहीं हटूंगी.”
कोर्ट ने मुख्य मामले से जुड़े प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है. प्रतिवादियों को शनिवार तक अपना जवाब दाखिल करना होगा.अदालत ने 29 और 30 अप्रैल को केस में बहस के लिए तारीख तय की है.
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा, “पूरे देश में जब एक बार फैसला सुरक्षित रख लिया जाता है तो उस स्थिति में कोई भी अतिरिक्त हलफनामा रिकॉर्ड पर नहीं लिया जाता, लेकिन कोर्ट ने फिर भी केजरीवाल का एडिशनल एफिडेविट रिकॉर्ड पर लिया है.” वहीं, जस्टिस शर्मा ने कहा, “सॉलिसिटर जनरल बिल्कुल सही कह रहे हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया है वह सबके लिए समान है, किसी खास व्यक्ति के लिए बदली नहीं जा सकता.” हालांकि, कोर्ट ने चूंकि केजरीवाल खुद अपनी पैरवी कर रहे थे, इसलिए उन्हें थोड़ी राहत देते हुए एडिशनल एफिडेविट को रिकॉर्ड पर ले लिया.
अदालत ने केजरीवाल का जवाब रिकॉर्ड पर ले लिया है.कोर्ट ने केजरीवाल को बताया कि इस मामले में आज शाम 4:30 बजे फैसला सुनाया जाना है.जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 13 अप्रैल को केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. चार घंटे से ज्यादा चली लंबी सुनवाई में दोनों पक्षों ने कड़ी बहस की, जिसमें केजरीवाल ने खुद कोर्ट में हाजिर होकर दलीलें दी थी.

इससे पहले हाईकोर्ट ने केजरीवाल की तरफ से दाखिल नए हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया था. हलफनामे में केजरीवाल ने दावा किया कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं, जिन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए केस मिलते हैं. मेहता सीबीआई की तरफ से पेश हो रहे हैं. ऐसे में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी? केजरीवाल ने कहा, “यह सीधा हितों का टकराव है, जिससे उनके रिक्यूजल यानी खुद को मामले से अलग करने की मांग और मजबूत हो जाती है.”
आरटीआई दस्तावेजों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि जज के बेटे को 2023 में 2,487, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 केस आवंटित किए गए. उन्होंने कहा कि ये तथ्य रिक्यूजल याचिका दाखिल करने के बाद उनकी जानकारी में आए। केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज पर कई आपत्तियां उठाई थीं.
सीबीआई ने केजरीवाल की इस दलील को पूरी तरह नकार दिया.सीबीआई ने अपने हलफनामे में कहा, “अगर केजरीवाल की यह दलील मान ली जाए कि जस्टिस शर्मा इसलिए रिक्यूज हो जाएं क्योंकि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं, तो देशभर के वे सभी जज जिनके रिश्तेदार किसी भी सरकारी पैनल पर हैं, उन्हें संबंधित सरकारों या राजनीतिक नेताओं के केस सुनने से रोक दिया जाएगा .इस तर्क को बढ़ा-चढ़ाकर लागू किया जाए तो सभी राज्य सरकारों, केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़े मामलों में ऐसे सभी जज अयोग्य माने जाएंगे जिनके रिश्तेदार इनके पैनल पर हैं.”
ये भी पढ़ें:Dharmendra Death: पंचतत्व में विलीन हुए धर्मेंद्र! पीएम मोदी समेत इन सेलेब्स ने दी श्रद्धांजलि

