Harish Rana:सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा का एम्स में निधन हो गया था.हरीश राणा को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई, जो एक भावुक क्षण था.दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. उनकी मृत्यु के बाद, उनके प्रियजनों ने उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए, और माहौल बेहद भावुक हो गया. उनके के परिवार और दोस्तों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी, और उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार
हरीश राणा के अंतिम संस्कार में सोसायटी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो उनकी लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाता है.दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह में सुबह 9 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां सोसायटीवासी और परिवार के सदस्य उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे.हरीश के निधन की खबर सुनकर सोसायटी में सन्नाटा पसर गया, और हर कोई उनकी और उनके परिवार की बहादुरी की चर्चा कर रहा था.बुधवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोसायटी से काफी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे, जो उनके प्रति लोगों के सम्मान और प्यार को दर्शाता है.

हरीश का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया गया, जिसमें परिवार और सोसायटी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. उनकी मृत्यु एक बड़ा नुकसान है, लेकिन उनकी यादें हमेशा उनके प्रियजनों के दिलों में बनी रहेंगी.
दर्दनाक हादसे ने बदल दी थी हरीश की जिदंगी
हरीश राणा का अंतिम संस्कार दिल्ली में डॉक्टरों की सलाह पर किया गया. परिवार ने पहले गाजियाबाद में अंतिम यात्रा निकालने और हिंडन घाट पर अंतिम संस्कार करने की योजना बनाई थी, लेकिन मेडिकेटेड बॉडी और मेडिकल इश्यूज के कारण ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया.
हरीश की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे ने बदल दी थी. साल 2013 में मात्र 19 साल की उम्र में वह कोमा में चले गए थे. वह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग का छात्र था, लेकिन अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे. तब से 13 साल तक वह मशीनों पर जिंदगी जीते रहे, आंखें कभी-कभी झपकतीं, लेकिन बोल नहीं पाते थे, हिल नहीं पाते थे.वह परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में रहे, लेकिन परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा.

हरीश की कहानी एक बहादुरी और संघर्ष की कहानी है, जो हमें जीवन की मूल्यवानता और परिवार के प्यार की शक्ति को समझाती है.उनकी मृत्यु एक बड़ा नुकसान है, लेकिन उनकी यादें हमेशा उनके प्रियजनों के दिलों में बनी रहेंगी.
24 मार्च को हुआ निधन
हरीश के परिवार ने उनकी जिंदगी के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन उनकी आत्मा उस शरीर में कैद थी, जहां दर्द हर पल उन्हें सताता रहता था. माता-पिता ने कभी हार नहीं मानी, उन्होंने डॉक्टरों, अस्पतालों और कोर्ट के दरवाजे खटखटाए, लेकिन बेटे के दर्द को देखकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक बेटे को सम्मानजनक मुक्ति देने की गुहार लगाई.सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी, जिसके बाद हरीश को 14 मार्च को एम्स में एडमिट किया गया.डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनके लाइफ स्पोर्ट सिस्टम को हटाना शुरू कर दिया, और बीते एक हफ्ते से उन्हें खाना-पानी भी नहीं दिया जा रहा था. इस दौरान केवल हरीश को दर्द और मानसिक तकलीफ से राहत देने के लिए दवाएं दी जा रही थी.हरीश के परिवार की बहादुरी और प्यार को सलाम है, जिन्होंने अपने बेटे के लिए हर संभव प्रयास किया और अंत में उन्हें सम्मानजनक मुक्ति दिलाई.

हरीश की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे से बदल गई जब 20 अगस्त 2013 को वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए.इसके बाद वह कोमा में चले गए और उनकी स्थिति स्थिर नहीं हो पाई.
साल 2022 में, हरीश के माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दाखिल की, लेकिन 8 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने 15 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रखा और अंत में 11 मार्च 2026 को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी.इसके बाद हरीश को 14 मार्च 2026 को एम्स, दिल्ली में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके लाइफ स्पोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाना शुरू कर दिया.अंत में, 24 मार्च 2026 को हरीश ने एम्स में अपनी अंतिम सांस ली.
ये भी पढ़ें:Dhanush ने पोंगल पर नई फिल्म का किया अनाउंसमेंट! देखें फिल्म का फर्स्ट लुक

