Thursday, February 5, 2026

UGC Regulations 2026: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम पर लगाई रोक! 19 मार्च को होगी अगली सुनवाई

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UGC Regulations 2026:सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी यानी उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें कहा गया था कि ये नियम सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव करते है.कोर्ट ने सुनवाई के बाद यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी और साल 2012 के पुराने नियमों को ही लागू रखने का आदेश दिया है.

केंद्र ने जारी किया नोटिस

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नया नियम अस्पष्ट है और कोर्ट ने आगे कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरूपयोग किया जा सकता है और इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी है.अब इस मामले पर सुनवाई 19 मार्च को की जाएगी. यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए.कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस भी जारी किया है.

UGC Regulations 2026 (photo credit-google)

SC ने केंद्र और यूजीसी ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई करते हुए केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा है.मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए, लेकिन नए नियम उल्टी दिशा में जाने जैसे लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन्हें सुरक्षा चाहिए, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए. कोर्ट ने विशेषज्ञों की मदद से नियमों की भाषा को स्पष्ट करने और एक विशेष कमेटी बनाने की बात भी कही है.

UGC Regulations 2026 (photo credit-google)

विनीत जिंदल ने दलीलों की सराहना

याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें रखी और कहा कि सीजेआई ने उनकी बातों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि सेक्शन 3C में सामान्य जाति को बाहर रखा गया है, जो यह संदेश देता है कि सामान्य जाति द्वारा SC, ST और OBC के साथ भेदभाव किया जा रहा है.विनीत जिंदल ने इसे एक बड़ी जीत बताया है. याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा -” आज सीजेआई ने हमारी दलीलों की सराहना की. हमें कहना है कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है और जैसा कि हम खास तौर पर तीन मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे, एक है सेक्शन 3C जो जातिगत भेदभाव के बारे में बात करता है और उसे खास सेक्शन में सामान्य जाति को बाहर रखा गया है. तो यह खास सेक्शन यह संदेश दे रहा है कि SC, ST और OBC के साथ भेदभाव किया जा रहा है.”

UGC Regulations 2026 (photo credit-google)

विनीत जिंदल ने आगे कहा कि सीजेआई ने उनकी दलील की सराहना की और कहा कि सेक्शन 3C सामान्य जाति के लिए भेदभावपूर्ण है और इसमें संशोधन होना चाहिए. अगर ऐसा होता तो निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होगा.उन्होंने इक्विटी कमेटी के गठन पर भी सवाल उठाया, जिसमें सामान्य समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं है. दूसरा हिस्सा इक्विटी कमेटी के संबंध में है जो इन नए यूजीसी सेक्शन के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है और इन खास नियमों में समान्य समुदाय के लिए कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं बताई गई है.सीजेआई ने सुझाव दिया कि एक विशेष कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिसमें शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो.अब इस मामले पर 19 मार्च को सुनवाई होगी.

नए यूजीसी नियम से देशभर में आक्रोश

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध हो रहा है. 23 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किए गए इन नियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के खिलाफ बताया जा रहा है. कई याचिकाकर्ताओं ने इसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन भी बताया है. मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने इन नियमों के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें कहा गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव करते हैं.

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