Thursday, February 5, 2026

UGC: जानें क्या है यूजीसी, क्यों इसे देश में माना जाता है उच्च शिक्षा व्यवस्था का रीढ़?

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UGC:जहां एक तरफ देश में यूजीसी के नए नियमों (UGC Act 2026) का मुद्दा गरमाया हुआ है वहीं हाल ही में इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. अब 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे. ये नियम उच्च शिक्षा से जुड़े हैं और इन पर देशभर में चर्चा हो रही है.ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि यूजीसी क्या है, इसका गठन कब और क्यों हुआ, और इसकी भूमिका क्या है.

क्या है यूजीसी?

यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन भारत में उच्च शिक्षा को नियंत्रित और बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख संस्था है.इसका गठन साल 1956 में हुआ था. यूजीसी के फैसले देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए इसके नए नियमों पर विवाद हो रहा है.

UGC (Photo credit -google)

यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन, जिसे हिंदी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कहा जाता है.यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है और उच्च शिक्षा को व्यवस्थित करने, समन्वय करने और गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाता है. यूजीसी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई, परीक्षा और रिसर्च के मानक तय करता है और योग्य संस्थानों को अनुदान देता है. इसके साथ ही, यह केंद्र और राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के विकास पर सलाह भी देता है.

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कब हुआ था यूजीसी का गठन?

हमारे देश भारत है उच्च शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है. नालंदा,तक्षिला और विक्रमशिला जैसे प्राचिन विश्वविद्यालयों में एशिया के कई देशों में छात्र पढ़ने आते हैं और ब्रिटिश काल में भी शिक्षा व्यवस्था में बहुत बड़े बदलाव हुए हैं. वहीं यूजीसी के गठन की बात की जाएं तो इसका संगठन 28 दिसंबर 1953 को हुआ था लेकिन इसे कानूनी दर्जा नवंबर 1956 में यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत मिला.भारत में उच्च शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है, और ब्रिटिश काल में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए. यूजीसी का मुख्य काम देश में विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को व्यवस्थित करना और गुणवत्ता बनाए रखना है.

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यूजीसी की प्रमुख जिम्मेदारियां

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) की प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार से हैं –

  • उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और व्यवस्थित करना.
  • डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट की मान्यता सुनिश्चित करना.
  • विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा और शोध के मानक तय करना.
  • शिक्षा से जुड़े नियम और दिशा-निर्देश बनाना.
  • विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को वित्तीय सहायता देना.
  • केंद्र और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना.
  • उच्च शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया में भूमिका निभाना.
  • शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नई पहल करना.

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