Trump:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने की मांग की गई है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों पर हमला करेगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “याद है जब मैंने ईरान को कोई डील करने या होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन दिए थे? समय तेजी से खत्म हो रहा है – 48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा.”

ट्रंप ने कहा कि ईरान ने उनसे अनुरोध किया था कि उनके ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को 7 दिनों के लिए रोक दिया जाए, लेकिन उन्होंने 10 दिन का समय दिया था. अब, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है, तो अमेरिका उनके पावर प्लांट्स और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करेगा.
Trump ने ईरान को दी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करेगा. ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ‘भारी तबाही’ मचाएगा.

ट्रंप ने कहा है कि ईरान के पावर प्लांट्स और बड़े-बड़े पुलों को निशाना बनाया जाएगा, जिससे कई शहरों का आपसी कनेक्शन कट जाएगा और ईरान अंदरूनी तौर पर भी अलग-थलग हो जाएगा. यह अल्टीमेटम 4 अप्रैल को जारी किया गया है और इसे इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है.
100 से अधिक प्लांट है ईरान में
ट्रंप की धमकियों के बाद सवाल उठता है कि ईरान में कितने पावर प्लांट और अहम पुल हैं, जिन पर अमेरिकी सेना निशाना साध सकती है.ईरान में विभिन्न प्रकार के पावर प्लांट हैं, जिनमें सोलर, हाइड्रो, वायु, कोयला और न्यूक्लियर प्लांट शामिल है. इनमें गैस पर आधारित पॉवर प्लांट्स अधिक है.
OpenInfraMap के डेटा के अनुसार, ईरान में करीब 110 गैस प्लांट हैं, जिनमें से कुछ हाइब्रिड है .बुशहर परमाणु पॉवर प्लांट, बुशेहर काउंटी, ईरान में स्थित है, जो एक न्यूक्लियर साइट के तौर पर देखी जाती है. यह 1,000 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है, जिसका निर्माण 1970 के दशक में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन 1979 की क्रांति के बाद, इसे रूस की रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने पूरा किया.

ईरान के इन पावर प्लांट्स और पुलों पर हमले का मतलब होगा कि ईरान की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा.इससे ईरान की आंतरिक स्थिति भी खराब हो सकती है और देश में अस्थिरता बढ़ सकती है.
ईरान बिजली को जीवाश्म ईंधनों से बनाता है
ईरान अपनी ज्यादातर बिजली जीवाश्म ईंधनों से बनाता है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है.2023 में ईरान ने न्यूक्लियर एनर्जी से 5,740 GWh बिजली बना है.ईरान के कुछ प्रमुख पावर प्लांट्स में रामिन अहवाज़ थर्मल पावर प्लांट (करीब 1900 मेगावाट), दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (लगभग 2800-3000 मेगावाट), जहरोम पावर प्लांट (करीब 1400 मेगावाट) और गनावेह पावर प्लांट (लगभग 484 मेगावाट) शामिल है.
जलविद्युत क्षेत्र में, करुन-3 हाइड्रोपावर प्लांट, मस्जिद-ए-सुलेमान हाइड्रोपावर प्लांट और शहीद अब्बासपुर हाइड्रोपावर प्लांट जैसे बड़े बांध आधारित संयंत्र हैं, जिनकी क्षमता लगभग 2000 मेगावाट के आसपास है.इसके अलावा, केर्मान पावर प्लांट और शाहिद राजाई पावर प्लांट जैसे थर्मल संयंत्र भी सैकड़ों मेगावाट क्षमता के साथ नेशनल ग्रिड को मजबूती देते हैं.
कुल मिलाकर, ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट के आसपास है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है, जबकि जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सीमित लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाते हैं.

ईरान में पुल
ईरान में कई बड़े और ऐतिहासिक पुल हैं, जो शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं और ईरान की विरासत को बचाए रखते हैं. इनमें से कुछ प्रमुख पुल हैं:
- करुण-4 आर्च ब्रिज: करुण नदी पर स्थित, यह ईरान के सबसे खास आर्च पुलों में से एक है.
- करज ब्रिज: 2026 में हुए संघर्षों के दौरान चर्चा में आया यह एक प्रमुख ब्रिज है.
- मेशगिन शहर सस्पेंशन ब्रिज: अर्दबील में स्थित, यह मध्य पूर्व का सबसे लंबा सस्पेंशन पुल है.
- लाली ब्रिज: ऊपरी गोटवंद बांध के पास स्थित.
- खाजू ब्रिज: इस्फ़हान में ज़ायंडेह नदी पर बना एक ऐतिहासिक पुल, जो 1650 के आसपास बना था.
हाल ही में, US और इज़रायली सेनाओं ने अल्बोर्ज़ प्रांत के करज के B1 पुल पर दो हमले किए, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया.करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक था.

