Saturday, February 14, 2026

Tarique Rehman का 17 साल बाद वापसी! बांग्लादेश में BNP को मिली पूर्ण बहुमत

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Tarique Rehman:तारिक रहमान की इस जीत को बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है. चुनाव के दिन, तारिक रहमान ने राजधानी ढाका के गुलशन मॉडल हाई स्कूल एंड कॉलेज मतदान केंद्र पर सुबह करीब 9:30 बजे अपना वोट डाला था.

17 साल बाद तारिक रहमान की हुई वापसी

बांग्लादेश के चुनावी समर में एक नए चेहरे की एंट्री हुई थी, जो 17 साल से देश से बाहर था.यह चेहरा तारिक रहमान का था, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और जियाउर रहमान के बेटे है.उन्हें बांग्लादेशी राजनीति का राजकुमार माना जाता है. चुनावी नतीजों में बीएनपी को बहुमत मिलने के बाद, वह प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार बन गए है.उनकी वतन वापसी के बाद से ही उम्मीद थी कि बीएनपी एक बार फिर सत्ता में आएगी.

Tarique Rehman (Photo credit -google)
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तारिक रहमान अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ देश लौटे, और उनका जोरदार स्वागत हुआ. वह बीते साल दिसंबर में ढाका पहुंचे थे, जहां उनकी पार्टी के हजारों समर्थक उनका इजारद कर रहे थे.उनकी मां, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, लंबे समय से बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं। बेटे के बांग्लादेश लौटने के बाद 30 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया.मां के निधन के बाद तारिक रहमान ने बीएनपी की कमान संभाल ली, जिससे जमात ए इस्लामी की मुश्किलें बढ़ गईं, जो बांग्लादेश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की बात करती है.

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश के एक प्रमुख राजनीतिक नेता है. वह पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं, और उनकी उम्र 60 वर्ष है. उनकी मां 1991 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं, जबकि उनके पिता बांग्लादेश में सेना प्रमुख और देश के छठे राष्ट्रपति रहे थे.तारिक रहमान 2008 में देश छोड़कर लंदन चले गए थे, और 2018 से विदेश से ही बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे.

Tarique Rehman (Photo credit -google)

तारिक रहमान की राजनीति पृष्ठभूमि मजबूत होने के बावजूद, उन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा.उनकी मां खालिदा जिया और अवामी लीग की नेता शेख हसीना एक दूसरे की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं.खालिदा जिया के दूसरे कार्यकाल (2001-2006) में तारिक रहमान को काफी प्रसिद्धि मिली, लेकिन उनकी पार्टी पर भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के आरोप भी लगे. साल 2006 से 2009 तक सेना के समर्थन वाली कार्यवाहक सरकार ने बीएनपी पर लगे आरोपों की जांच की, और 2007 में तारिक रहमान को ढाका स्थित बंगले से गिरफ्तार कर लिया गया.बाद में उन्हें जमानत मिली और इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए, जहां से वह वापस नहीं आए.

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