Sunday, March 22, 2026

Supreme Court ने की आवारा कुत्तों पर सुनवाई! सड़क के हर कुत्ते को हटाने का नहीं दिया निर्देश

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में चिंता जताई है, खासकर अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों पर उनकी सुरक्षा को लेकर.कोर्ट ने पूछा है कि अस्पताल के गलियारों और मरीजों के आसपास कितने कुत्तों को घूमने की अनुमति दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा है कि बच्चे, वयस्क, सभी को काटा जा रहा है और लोग मर रहे हैं, जो एक गंभीर समस्या है.

Street Dogs (Photo credit -google)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर फिर से सुनवाई की. कोर्ट आवारा जानवरों से होने वाले खतरों और उन्हें नियंत्रित करने में स्थानीय अधिकारियों की कथित कमियों पर याचिकाओं की जांच कर रहा है.

लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि दिल्ली में चूहों और बंदरों का भी खतरा है. उन्होंने तर्क दिया कि कुत्तों को अचानक हटाने से चूहों की आबादी बढ़ सकती है, क्योंकि कुत्ते इस संतुलन को बनाए रखते हैं.

तो बिल्लियों को बढ़ाना चाहिए ? : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने वकील की दलील पर सवाल उठाया, “तो क्या बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए?” न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने मजाकिया अंदाज में कहा, “क्या इसका आपस में कोई संबंध है? हमें बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि वे चूहों की दुश्मन हैं.” सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने गली के हर कुत्ते को हटाने का निर्देश नहीं दिया है, बल्कि उनके साथ नियमानुसार व्यवहार किया जाना चाहिए?

Street Dogs (Photo credit -google)

SC ने सभी आवारा कुत्तों को हटाने का नहीं दिया है निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में अपने पहले के निर्देशों को स्पष्ट किया है.न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि सड़कों से हर आवारा कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं दिया गया था.कोर्ट ने जोर देकर कहा कि नियमों के तहत उन्हें केवल संस्थागत इलाकों से हटाए जाने के निर्देश दिए गए थे.सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी गई है.

Street Dogs (Photo credit -google)

सुप्रीम कोर्ट में कल फिर से आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई होगी. बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सभी कुत्तों को पकड़ना समाधान नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है.सिब्बल ने तर्क दिया कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना संभव नहीं है, न ही यह आर्थिक रूप से व्यावहारिक है.इसे वैज्ञानिक तरीके से करना होगा, लेकिन समस्या यह है कि कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है.

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