Politics: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर हंगामा मच गया है. उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी उनसे नाराज हैं, लेकिन दिलीप सिन्हा ने इसका कड़ा जवाब दिया है. बैठक के दौरान पीएम मोदी व्यापारिक और रणनीतिक मोर्चा पर पीएम मोदी उनसे नाराज़ हैं और इस पर संयुक्त राष्ट्र ( जेनेवा) में भारत के पू्र्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा की कड़ी प्रतिक्रिया आई है.

पूर्व राजदूत दिलीप सिन्हा ने कही ये बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर, UN जिनेवा में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा कहते हैं, “मुझे कहना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप में ह्यूमर की भावना है. उन्होंने जो बयान दिया कि प्रधानमंत्री मोदी खुश नहीं हैं, वह बहुत कम कहा गया है. बेशक, प्रधानमंत्री के तौर पर, वह कड़े बयान नहीं दे सकते.लेकिन सच यह है कि भारत में लोगों की राय राष्ट्रपति ट्रंप के बहुत ज़्यादा खिलाफ है और इसका कारण भी है. भारत अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाए गए सबसे ज़्यादा टैरिफ का शिकार है और वह भी बिना किसी वजह के, क्योंकि भारतीय कंपनियाँ रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का भी पालन कर रही हैं, जो UN नियमों के खिलाफ हैं, क्योंकि सिर्फ़ UN सुरक्षा परिषद ही किसी देश पर प्रतिबंध लगा सकती है. उसने रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.इसलिए, भारत को रूस से तेल खरीदने का पूरा अधिकार है, जैसा कि यूरोप खुद करता है. यूरोप खुद रूस से नेचुरल गैस खरीदता है, और अमेरिका रूस से कई प्रोडक्ट इंपोर्ट करता है. वह रूस के साथ व्यापार भी कर रहा है.तो अमेरिका रूस पर जो प्रतिबंध लगा रहा है, उसकी छोटी-छोटी बातों का भी भारतीय कंपनियाँ पालन कर रही हैं. तो भारत को किस बात के लिए सज़ा दी जा रही है, यह समझना मुश्किल है… इस स्थिति में, कोई कारण नहीं है कि भारतीय ट्रंप से खुश हों…”
भारत-अमेरिका के संबंधों में आया तनाव
ट्रंप ने कहा है कि उनके और पीएम मोदी के बीच निजी संबंध अच्छे हैं, लेकिन व्यापार और रणनीति के मामले में पीएम मोदी उनसे नाराज़ हैं. ट्रंप का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, इसलिए अमेरिका ने उन पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि भारत को उन्हें खुश करना होगा, नहीं तो अमेरिका टैरिफ और बढ़ा सकता है.इस पर पूर्व राजदूत दिलीप सिन्हा ने कहा है कि ट्रंप का बयान बहुत हल्का है. उन्होंने कहा कि न केवल पीएम मोदी, बल्कि भारतीय जनता भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों से नाराज है. लगता है, ट्रंप के इस बयान ने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है.

वहीं दिलीप सिन्हा ने ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि भारत को रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए निशाना बनाना दोहरा मापदंड है. यूरोप और अमेरिका खुद रूस से ऊर्जा और उत्पाद आयात करते हैं, तो भारत को क्यों दंडित किया जा रहा है? अमेरिका के प्रतिबंधों का पालन भारतीय कंपनियां पहले ही कर रही हैं, फिर भारत को सजा क्यों?सिन्हा ने कहा कि ट्रंप का बयान समझ से परे है और भारतीय जनता उनसे खुश नहीं है। लगता है, ट्रंप प्रशासन की नीतियों में दोहरा मापदंड है, जो भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकता है.

बता दें कि ट्रंप ने पिछले साल भारत पर टैरिफ का बम गिराया था. उन्होंने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ भी लगाया, जिससे कुछ श्रेणियों में कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया. इस फैसले से भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आ गई थी. भारत ने तब साफ कहा था कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले करेगा. लगता है, ट्रंप फिर से वही रास्ता अपनाना चाहते हैं, जिससे संबंध और खराब हो सकते हैं.
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