Meta Layoffs 2026:मेटा 20 मई से करीब 8,000 कर्मचारियों को कंपनी से बाहर करने की तैयारी में है. CEO मार्क जुकरबर्ग अब कंपनी को ज्यादा कॉम्पैक्ट टीमों के साथ चलाना चाहते हैं और उनका पूरा जोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर शिफ्ट हो गया है.
मेटा ने किया 8000 कर्मचारियों को बाहर (Meta Layoffs 2026)
एक तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट से ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, तो दूसरी तरफ टेक इंडस्ट्री में AI की वजह से छंटनी का दौर तेज हो गया है.
फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा 20 मई को लगभग 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जा रही है.कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग अब मेटा को नए सिरे से ढाल रहे हैं, जहां फोकस छोटी टीमों और AI-ड्रिवन ऑपरेशन्स पर होगा.
हाल ही में Q1 के नतीजे जारी करते वक्त जुकरबर्ग ने साफ कर दिया था कि मेटा अब सिर्फ उन्हीं लोगों को अपने साथ रखेगी जो अकेले दम पर बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को हैंडल कर सकें.
AI से बदल रहा मेटा का स्ट्रक्चर
मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक, AI टूल्स के आने के बाद अब 1-2 लोग ही एक हफ्ते में उतना काम पूरा कर ले रहे हैं जिसे पहले दर्जनों इंजीनियर महीनों में करते थे. इसी टेक्नोलॉजिकल बदलाव को ध्यान में रखते हुए मेटा अपनी टीमों को छोटा लेकिन ज्यादा असरदार बना रही है.
जुकरबर्ग का कहना है कि यह कदम सिर्फ खर्च घटाने के लिए नहीं उठाया गया है, बल्कि मेटा को आने वाले समय की डिमांड और कॉम्पिटिशन के लिए तैयार करने की एक स्ट्रैटेजिक प्लानिंग है. कंपनी अब “अल्ट्रा-फ्लैट” मॉडल अपना रही है, जिसमें 50 इंजीनियरों की टीम पर सिर्फ एक मैनेजर होगा.
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्डतोड़ खर्च और शेयर बाजार का रिएक्शन
मेटा इस साल अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 125 से 145 अरब डॉलर का ऐतिहासिक कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रही है.इस खर्च का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर बनाने, खुद के कस्टम चिप्स डेवलप करने और AI मॉडल्स की ट्रेनिंग पर लगाया जा रहा है.
कंपनी की CFO सुसान ली ने बताया कि इन्फ्रा पर होने वाला खर्च पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना हो चुका है. इस वजह से कर्मचारियों की सैलरी और कंपनी के कुल बजट के बीच बैलेंस बिगड़ गया है. इसी गैप को ठीक करने के लिए 20 मई को 8,000 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला लिया गया.
सुसान ली ने यह भी माना कि AI की तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के बीच मेटा का आइडियल साइज क्या होना चाहिए, इसका अब कोई तय जवाब नहीं बचा है.इस भारी-भरकम खर्च और आगे की अनिश्चितता को देखकर निवेशकों में भी घबराहट दिखी.नतीजा ये रहा कि अर्निंग कॉल के बाद मेटा के शेयर 6% तक गिर गए.

गिरता मोरल और AI से निगरानी
एक तरफ पूरी इंडस्ट्री में बहस चल रही है कि AI इंसानों की नौकरी खा रहा है, तो दूसरी तरफ मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी कर्मचारियों की स्किल और प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएगी, खत्म नहीं करेगी. लेकिन मेटा के अंदर की हकीकत कुछ और ही कहानी बता रही है.
कंपनी ने “मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव” नाम का एक इंटरनल ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया है. यह टूल AI एजेंट्स को ट्रेन करने के लिए कर्मचारियों के हर कीस्ट्रोक, माउस क्लिक और स्क्रीन मूवमेंट तक को रिकॉर्ड कर रहा है.इतना ही नहीं, अब परफॉर्मेंस रिव्यू में भी यह देखा जा रहा है कि कोई एम्प्लॉई AI टूल्स का कितना इस्तेमाल कर रहा है.
इन सख्त और लगातार बदलते नियमों की वजह से कंपनी के अंदर कर्मचारियों का जोश और भरोसा अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
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