Foreign Minister Jaishankar:विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि वैश्विक तनाव के बीच कोई भी देश पूरी तरह से वैश्विक प्रभुत्व नहीं रखता है और आने वाला समय बहुध्रुवीय विश्व का होगा. उन्होंने रायसीना डायलॉग 2026 में यह बात कही.जयशंकर ने कहा कि दुनिया में ताकत के कई केंद्र हैं और सभी देशों को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए.जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन की नई नीतियों ने अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है. उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण, सप्लाई असुरक्षा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश हर आकस्मिकता के लिए खुद को तैयार कर रहे है.

विदेश मंत्री जयशंकर ने कही ये बात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि वैश्विक तनाव के बीच कोई भी देश पूरी तरह से हावी नहीं है. उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के मध्य से एक निश्चित विश्व व्यवस्था बनाए रखने की वैश्विक अपेक्षा अवास्तविक थी, और अब शक्ति विभिन्न आयामों में काफी हद तक फैल गई है.जयशंकर ने कहा कि दुनिया में ताकत के कई केंद्र हैं और सभी देशों को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए.उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है और अब कोई भी देश अपनी मर्जी नहीं थोप सकता है. जयशंकर ने कहा कि भारत नियम-आधारित व्यवस्था और बातचीत में विश्वास रखता है.

वैश्विक शासन पर कही ये बात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2026 में कहा कि वैश्विक शासन का स्वरूप पिछले सात दशकों में काफी बदल गया है.उन्होंने कहा कि 1945 या 1989 में वैश्विक व्यवस्था को स्थिर मानने की उम्मीद करना अवास्तविक था, क्योंकि शक्ति विभिन्न आयामों में फैल गई है.जयशंकर ने कहा कि दुनिया में ताकत के कई केंद्र हैं और सभी देशों को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए.उन्होंने कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है और अब कोई भी देश अपनी मर्जी नहीं थोप सकता है. जयशंकर ने कहा कि भारत नियम-आधारित व्यवस्था और बातचीत में विश्वास रखता है.विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2026 में कहा कि 1945 या 1989 के बाद बने विश्व व्यवस्था को हमेशा के लिए बनाए रखने की उम्मीद करना अवास्तविक था. उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल भारत के हजारों साल के इतिहास का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है, इसलिए दुनिया का बदलना स्वाभाविक है.जयशंकर ने कहा कि शक्ति विभिन्न आयामों में फैल गई है और दुनिया में ताकत के कई केंद्र हैं.

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में बदलाव को स्वीकार करने की बात कही गई है और यह बदलाव स्वाभाविक है. जयशंकर ने कहा कि भारत नियम-आधारित व्यवस्था और no बातचीत में विश्वास रखता है.
वैश्विक व्यवस्था के पीछे बताया दो बड़ी ताकतें
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें काम कर रही हैं – तकनीक (टेक्नोलॉजी) और जनसंख्या का स्वरूप (डेमोग्राफी). उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में यही दोनों कारक दुनिया की दिशा तय करेंगे. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दुनिया धीरे-धीरे कई ताकतों में बंट रही है.
उन्होंने कहा कि अब कोई भी देश ऐसा नहीं है, जो हर क्षेत्र में पूरी तरह से हावी हो.ताकत का मतलब सिर्फ जीडीपी या सैन्य शक्ति नहीं रह गया है.दुनिया के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं, इसलिए वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैली हुई है.जयशंकर ने कहा कि भारत भी अपनी ताकत के अनुसार वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है.
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