Wednesday, April 8, 2026

Donald Trump ने धमकी के बाद क्यों किया सीजफायर? जानें इसकी असली वज़ह

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Donald Trump:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें है.दोनों देशों ने दो हफ्ते के लिए एकदूसरे पर हमले रोक दिए हैं और होर्मुज खोलने पर सहमति जताई है, लेकिन ईरान की शर्तों पर. यह बदलाव कैसे आया‌ और कैसे डोनाल्ड ट्रम्प धमकी के बाद सीजफायर के लिए मान गए आपको बताते हैं इस आर्टिकल में –

Donald Trump(Photo credit -google)

28 फरवरी की सुबह जब अमेरिका ने ईरान पर आपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी तो व्हाइट हाउस में यह सबको यकीन था कि यह जंग कुछ दिनों तक ही चलेगा लेकिन इसमें रणनीति वेनेजुएला जैसे होगा तेज़ साफ और निर्णायक यह नहीं पता था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भरोसा था कि ईरान झुक जाएगा लेकिन 6 हफ्ते और 13000 से अधिक हमलों के बाद तस्वीरें अलग ही दिखाई पड़ रही है.ईरान ने ना सिर्फ मिसाइलों दागना जारी रखा बल्कि होर्मुन जलडमरूमध्य को भी अपने हाथ में कर लिया है और आखिरकार 14 दिनों का सीजफायर स्वीकार कर लिया गया है.

क्यों ट्रम्प ने बदला अपना फैसला?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें सामने आ रही है और ट्रंप ने ईरान को सभ्यता मिटा देने की धमकी दी थी, लेकिन अब 14 दिन का संघर्षविराम स्वीकार कर लिया है.ऐसा क्यों हुआ चलिए आपको बताते हैं –

Donald Trump(Photo credit -google)

अमेरिका ने 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था, लेकिन ईरान ने हार नहीं मानी.ईरान ने मिसाइलें दागना जारी रखा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर काबू रखा. ट्रंप के पीछे हटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, मिलिट्री कॉन्सिक्वेंसेज, और आर्थिक प्रभाव. ईरान ने अपनी ताकत दिखाई और अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया.

14 दिन का सीजफायर क्यों किया स्वीकार?

ट्रंप ने एक ही दिन में ईरान को सर्वनाश की धमकी देने से लेकर एक “काम करने लायक” प्रस्ताव पर सहमति जताने तक का सफर तय किया. उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य न खोलने पर ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी दी थी, लेकिन समयसीमा से 90 मिनट पहले ही इसे वापस ले लिया.नतीजा यह हुआ कि अमेरिका, ईरान और इस्राइल ने 14 दिन के संघर्षविराम पर सहमति जताई.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने अपने सभी सैन्य उद्देश्य पूरे कर लिए हैं और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति के लिए एक निर्णायक समझौते के बहुत करीब हैं.”यह बदलाव कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, मिलिट्री कॉन्सिक्वेंसेज, और आर्थिक प्रभाव. ईरान ने अपनी ताकत दिखाई और अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया.

Donald Trump(Photo credit -google)

बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की जड़ें 1953 में शुरू हुईं, जब अमेरिका ने ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्दिक का तख्ता पलट दिया.इसके बाद, ईरान में अमेरिका विरोधी भावना बढ़ी और 1979 में अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ, जिसमें 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया.

हाल के वर्षों में, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है, खासकर 2020 में ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए.

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