TMC:पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने का सदमा ममता बनर्जी अभी भूला भी नहीं पाई थीं कि अब उनके अपने ही उनसे किनारा करने लगे हैं. पहले टीएमसी के विधायकों ने बगावती सुर अलापे और अब पार्टी के सांसद भी अलग राह पकड़ने की तैयारी में दिख रहे है.
पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. 15 साल तक चली सत्ता हाथ से निकलने के बाद तृणमूल कांग्रेस अंदर से कमजोर पड़ती नजर आ रही है और पार्टी एक-एक कर बिखरती जा रही है.

जब ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी खेमे को एकजुट करने की कोशिश कर रही थीं, ठीक उसी वक्त बंगाल में बड़ा उलटफेर हो गया. TMC के कद्दावर सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अचानक संसद और पार्टी दोनों से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया.
सूत्रों की मानें तो पार्टी की एक और सांसद कोयल मलिक भी जल्द ही अपना इस्तीफा सौंप सकती हैं. उधर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार दिल्ली में सक्रिय हैं और सियासी हलचल बढ़ा रहे हैं.
विधायकों के बाद अब सांसदों का बगावती तेवर अपनाना TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद से पार्टी के अंदर जो घमासान मचा है, उसकी कहानी दिन-ब-दिन दिलचस्प होती जा रही है.

ममता बनर्जी को लगा एक और झटका, करीबी शताब्दी रॉय ने बोला हमला
टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि दीदी अब पहले जैसी नहीं रही.उनका आरोप है कि पार्टी के अंदर उनकी बात को तवज्जो नहीं दी जाती थी. ममता बनर्जी तक पहुंच भी सिर्फ चुनिंदा लोगों तक सीमित रह गई थी.
चार बार सांसद रह चुकी हैं शताब्दी रॉय
शताब्दी रॉय 2009 से ममता बनर्जी के साथ जुड़ी हुई हैं और चार बार सांसद बन चुकी हैं. ममता के खिलाफ बगावत करने वाले सांसदों के गुट में शताब्दी रॉय को डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी मिली है. एक न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में जब भी उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की, तो उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई.

शताब्दी ने कहा, “मैं हमेशा जनता की सेवा करना चाहती थी, लेकिन हमारी आवाज को अनसुना कर दिया गया.बीते कुछ सालों में ममता बनर्जी के रवैये में काफी बदलाव आ गया है. कोई भी फैसला लेने से पहले हमसे राय नहीं ली जाती थी, और अगर हम बोलने की कोशिश करते तो हमें चुप रहने के लिए कह दिया जाता था.”
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